वो यादें अजीब हैं
दर्द देतीं है वो
परिचित है अभी भी
पर अब कहाँ है ?
दुःख है बहुत
खेद है जीने का उन्हें |
क्यूँ ?
आखिर क्यूँ जिया मैं ?
उन्हें जो हैं अब लापता
वीरानो में कहीं
वो अच्छी थी
पर अब सोचूं तो दर्द क्यूँ
अजीब सी है चुभन |
फिर नहीं पा सकता हूँ माना
फिर भी आती है हृदय को दुखाने
बिन बताये
मन से पूछूं ,बताओ कैसी हैं वो ?
शब्द एक "अनमोल " |
फिर क्यूँ रोए तू
उन्हें सोच कर |
कहता है !
वो थी कभी , पर
अब नहीं हैं
इसीलिए ह्रदय भी दुरुस्त नही है
दुःखता है वो
जब लाता है तू उन्हें
अतीत के झरोखों से |
उन्हें वहीं तक सीमित रहने दे ......
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